valentine day kyo manaya jata hai? दोस्तों क्या आपको पता है?

Valentine’s Day कौन मनाता है ? आप ने कभी जानने की कोशिश की है ? जिसको India में पागलो की तरह आप सभी लोग मनाते है ।

क्या आप के परिवार वालो ने कभी Valentine’s Day के बारे में बताया क़ि इसे कौन मनाता है ?
valentine’s day क्या है? कौन मना सकता है ? ये किसके लिए है ? valentine day kyo manaya jata hai? kyaa hai iske peeche ka sach?
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इसके जानने के लिए valentine day kyo manaya jata hai? kyaa hai iske peeche ka sach? पढ़े।

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Valentine day kyo manaya jata hai?- इतिहास

चलिए जानते है कि valentine day kyo manaya jata hai? शताब्दी की शुरुवात में, यूरोप में एक संत हुए जिनका नाम था valentine।

ये Rome में पैदा हुए और उस समय Rome का राजा Claudius था। .

वह बड़ा क्रूर और आतंकी था। उसकी क्रूरता और आतंक यूरोप के इतिहास में भरे पड़े है।

यह वही Claudius है जो कहता है कि हम तो महान यूरोपियन परम्परा के वाहक है जिसमे स्त्री को रखेल बना के रखा जाता है। स्त्री को पत्नी का दर्जा देना मूर्खता है।

उसी Claudius के राज्य में valentine हो गए।

जो घूम घूम कर ये कहते थे कि शादी करके रहो और एक पत्नी के साथ रहो।
उन्होंने साहित्य का अध्ययन किया।

और भारतीय साहित्य से उन्हें पता चला कि एक पत्नी के साथ रहना, एक स्त्री के साथ रहना कितना सुखद रहता है।

उसमे complications कम होते है। उसमे बीमारिया कम होती है। ये सब उन्होंने पढ़ा।

यह भारत का साहित्य इतिहास मिला कैसे ?

यह मिला इस तरीके से कि भारत का व्यपार चला यूरोप के लोगो के साथ। पांचवी शताब्दी के शुरुवात में और चौथी शताब्दी के अंत में valentine को भारत शास्त्र मिल गया था और उसका उन्होंने अध्यन कर लिया।

अधययन कर के पता चला कि भारत के परिवार की व्यवस्था इस तरह की है।

Valentine को फ़ासी क्यों हुई ?

valentine day kyo manaya jata hai?www.simplifyconcept.comValentine ने भरपूर प्रचार किया। उन्होंने हर जगह बोला कि शादी करो और आराम से रहो ।

वह मशहूर हो गए और उनका प्रभाव लोगो पर इतना ज्यादा पड़ा कि सभी शादी करने के लिए तैयार हो गए।
वे व्यख्यान देते थे, गांव गांव में जाकर लोगो को समझाते थे, सभी को की शादी करने के क्या फायदे है और शादी करने के बाद शारीरिक सम्बंद करने के क्या फायदे है।

वह सब को समझाया करते थे। Claudius उनसे चिढ़ता था। Claudius यह कहता था की हमारी परम्परा महान है।

जो यूरोप में जो शादी नहीं किया है उसका यह नाश करने में लगे है।
Claudius को बहुत ज्यादा गुस्सा आया तो उसने क्या किया ?
valentine को फांसी पर चढ़ाने का आदेश दे दिया। राजा तो राजा होता है।

वो कोई भी आदेश दे सकता था। राजा के मुँह से निकले शब्द ही कानून माने को जाते थे। और १४ फ़रवरी सन् ४९८ को valentine को फ़ासी पे चढ़ा दिया।

valentine day kyo manaya jata hai?

चूँकि वैलेंटाइन एक पादरी थे। और लोगो की शादिया कराते थे। इसीलिए क्लॉडियस ने उनका प्रभाव काम करने के लिए और उनको गलत साबित करने के लिए सभी के सामने खुले आसमान के नीचे उन्हें १४ फ़रवरी सन् ४९८ को फांसी पर लटका दिया गया।
उनके फांसी होने के बाद उनके दुखद याद में १४ फ़रवरी सन् ४९८ से valentine’s day मनाना शुरू कर दिया गया। तो उस दिन से valentine’s day मनाया जाता है।

Europe में स्त्री और परिवार

परिवार में बच्चो को पालने की परम्परा हजारो साल से है एक बात और दूसरी बात जिससे ज्यादा गम्भीर है की यूरोप के परिवारों में बच्चे का बाप कौन है ?
ये पता करना एक दम मुश्किल है।
बहुत मुश्किल है ?
कारण क्या है ?
वहाँ जो शारीरिक सम्बन्ध इतने खुले है, इतने free है कि कोई भी किसी के साथ जाये।

जिन समाजो में शारीरिक सम्बन्ध बहुत ही खुले होते है, जहाँ पर शारीरिक सम्बन्धो मे freedom होता है वहाँ पर बाप का पता करना बड़ा मुश्किल होता है।
क्योकि वो माँ जानती नहीं है कि। . . . . . . .
और वह ऐसा क्यों होता है ?
क्योकि उनका मानना है कि sex ही जिंदगी का चरम आनंद है, इसके अलावा कुछ भी नहीं।
अगर आप एक पति से संतुष्ठ हो तो ठीक है।

नहीं, तो दो के पास, तीन के पास, दस के पास, बीस के पास, पचास के पास संतुष्टि के लिए जा सकते है। कोई फर्क नहीं पड़ता।
क्यों ?

सेक्स ही जिंदगी का चरम आनंद

क्योकि सेक्स ही जिंदगी का चरम आनंद है।
यही बात प्लेटो कहता है। अरस्तु कहता है। रूसो कहता है। सारे philosophers कहते है कि हमारे जिंदगी का चर्म आनंद ही है सेक्स में डूबना।
एक से नहीं मिलेगा तो दूसरा, दूसरे से नहीं मिलेगा तो तीसरा।
इस तरह शारीरिक सम्बन्ध में कोई मर्यादा नहीं है। वहाँ विवाह करना जरुरी नहीं है। इस लिए यूरोप में विवाह को महत्त्व ही नहीं देते है। लोग यूरोप में बिना विवाह के रहना अधिक पसंद करते है।

Live in Relationship – भी एक कारण कि valentine day kyo manaya jata hai?

English में आज कल शब्द आया है live in relationship . बहुत चल रहा है। इसका मतलब है बिना विवाह के साथ साथ रहना।

दो दिन, एक साथ। तीन दिन किसी और के साथ, अगले दिन किसी और के साथ। वे लोग ऐसे ही करते है।

चाहे महीने साल में कितना भी बदल दो, कोई फर्क नहीं पड़ता।
उन लोगो का ये आज की परंम्परा नहीं है हजारो साल की है।

विवाह होता नहीं है बिना विवाह का ही सब होता है। तो विवाह की कोई परम्परा ही नहीं है।

मान्यता भी नहीं है। इस लिए वहाँ विवाह करना, कराना कोई जरुरी बात नहीं मानी जाती।

अब सेक्स सम्बन्ध ही चरम है तो फिर वहाँ मान्यता कैसी ?

वहाँ स्त्री और पुरष जैसे कि इस्तमाल करने वाली वस्तु है। जब तक मजा देती है इस्तेमाल करो।

जिस दिन नहीं देती है फेक दो।

नयी ले आओ।

तो महिला/पुरुष जब तक आनंद दे रहे है। तब तक रखो। आनंद नहीं दे रही है तो छोड़ दो। दूसरी ले आओ, बाजार में तो मिलती ही है।

यूरोप में परिवार बनता नहीं है।

परिवार तो कुछ निश्चित बिंदु से शुरू होता है।

अब ऐसे समाज में कोई माँ कैसे कह सकती है कि ये तेरे पिता है। ये एक दो साल से नहीं, बल्कि लगभग २५०० सालोे से चलता आ रहा है। आज भी यूरोप में २०२० में यही चल रहा है। maximum लोग live in relationship में है।

धर्म पत्नी और पति बन के नहीं बल्कि girlfriend और boyfriend बनके जी रहे है।
पति पत्नी है तो हमारी परिभाषा है।
फिर बीच बीच में यूरोप में कुछ लोग ऐसे आये जिन्होंने इसको बदलने कि कोशिश की।

वे कहने लगे कि ये परंपरा अच्छी नहीं है, गलत है।

इसमें कुछ सीमाएं तय करो , नियम बनाओ, परिवार बनाओ, शादियाँ करो।
इस तरह कहने वाले कुछ लोग आते रहे। लेकिन उनको जिन्दा नहीं रहने दिया।

ऐसे ही एक यूरोपियन व्यक्ति थे Valentine। जो आज से लगभग १६०० साल पहले यूरोप में पैदा हुए थे।

Valentine के दर्शन

valentine day kyo manaya jata hai? www.simplifyconcept.comवे बोलते थे कि जो हम जानवरो की तरह से शारीरिक सम्बंद रखते है ये अच्छे नहीं है। इनमे खराबी है इनको ठीक करो।

एक पति और एक पत्नी की तरह ही एक साथ रहो। विवाह करके रहो।

शारीरिक सम्बन्धों को विवाह के बाद ही शुरू करो।

वह ऐसी बाते करते थे। जो भी नौजवान उनके सम्बन्ध में आते थे वे इनको यही सिखाते थे।

रोज उनका भाषण यही चलता था। संयोग से वे चर्च फ़ादरी हो गए। तो चर्च आने वाले आदमी को वे यही बोलते थे की शादी करो तभी सम्बन्ध रखो।

बिना शादी के सम्बन्ध मत रखो।

Valentine पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव

आज से १६०० साल पहले भारतीय संस्कृति का प्रभाव चारो तरफ था।

इसको प्रभाव को अलग अलग देशो में अलग अलग नामो से जाना जाता था। चीन ,इंडोनेसिया ,मलेसिया में भारतीय सभ्यता बुद्धिजम के नाम से जानी जाती थी।

सब जगह भारत और भारतीय संस्कृति थी। Valentine चर्च में बच्चो की शादियाँ कराते थे। और सभी को शादी का परामर्श देते थे।

क्लॉडियस को ये पसंद नहीं था। वह कहता था कि valentine उसके यूरोप के परम्परा को ख़राब कर रहा है।

हम बिना शादी करके रहने वाले लोग मौज मजे में रहने वाले लोग है। ये सबको शादियाँ करवाता फिर रहा है।
तो cloddish ने एक दिन वैलेंटाइन को गिरफ्तारी का आदेश दिया।

उसने वैलेंटाइन पर आरोप लगाया और बोला कि तुम अधर्म फैला रहे हो।

तुम दूसरी संस्कृति ला रहे हो। हमको ये मंजूर नहीं है।
फिर उसने वैलेंटाइन को फ़ासी की सजा का आदेश दे दिया। तो १४ फरवरी के दिन valentine को फ़ासी की सजा दे दी गयी।

आरोप क्या था ? कि वो बच्चो की शादियाँ करवाते थे। इसलिए फ़ासी हो गयी मानो शादी करवाना जुर्म है।

और उसके बाद से उनके शोक में valentine’s day मनाया जाता है।

भारत में valentine day kyo manaya jata hai?

अब भारत में valentine day kyo manaya jata hai? बिना सोचे समझे हमने valentine’s day चालू कर दिया।

स्कूलों और कॉलेजो में पागलो की तरह valentine’s day मनाया जाता है। बड़ी बड़ी कम्पनिया greeting cards बेचने लग गए।

टीवी चैनल वालो ने उसका प्रचार करने लगे तो गली मोहल्ले के छोटे छोटे बच्चे, दस दस बारह बारह साल के बच्चे valentine’s day में फसे हुए है।
अब सोचिये ये सोचने की बात है कि जिस देश की संस्कृति इतनी महान है कि दूसरे देश उसे अपनाये।

दूसरे देश वाले उसे अपने देश में फैलाये।

जिस संस्कृति को अपनाने के लिए वैलेंटाइन फांसी पर चढ़ गए, उसी संस्कृति को छोड़ के हम दूसरे की संस्कृति अपनाने में लगे है।
जरा सोचिये, कितनी अजीब बात है मनाते है वैलेंटाइन डे और विचार क्लॉडियस का अपनाते है।

याद करते है वैलेंटाइन को और काम करते है क्लॉडियस का।

वैलेंटाइन हमारी संस्कृति अपनाया और अपनी छोड़ा और हम उसी को याद करते है और उसी का उल्टा करते है लेकिन क्लॉडियस के संस्कृति अपनाते है। कितना दोगलापन !

 

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